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दस्ताना

5 मिनटउम्र 2–6 साल
दस्ताना

इस भाषा में कहानी सुनने की सुविधा ऐप में उपलब्ध है।

कहानी में क्या होता है

बर्फ़ीले जंगल में एक बूढ़े आदमी का लाल दस्ताना गिर जाता है। एक-एक करके जानवर गर्मी पाने के लिए उसमें घुस जाते हैं, छोटे चूहे से लेकर बड़े भालू तक। दस्ताना खिंचता जाता है, फिर कुत्ते के भौंकने से सब चौंक जाते हैं।

सर्दियों के एक बर्फ़ीले दिन, एक बूढ़े दादाजी अपने छोटे से सफ़ेद कुत्ते के साथ जंगल में घूमने निकले। उनके जूतों के नीचे बर्फ़ चर-मर, चर-मर करती थी। उन्होंने लाल रंग के गरम दस्ताने पहने थे, जो उनकी पोती ने बुने थे। पर चलते-चलते एक दस्ताना जेब से गिर गया, और दादाजी को पता ही नहीं चला। धप! लाल, प्यारा-सा दस्ताना नरम सफ़ेद बर्फ़ पर पड़ा रह गया, और दादाजी आगे चले गए।

तभी एक छोटी चुहिया बर्फ़ में दौड़ती हुई आई। "अरे, ये क्या है?" वह चीं-चीं करके बोली। "एक छोटा-सा लाल घर!" वह अंदर चली गई। अंदर नरम-नरम और गरम-गरम था। चुहिया बोली, "मैं यहीं रहूँगी।" फिर एक मेंढक फुदकता हुआ आया, ठंड से काँपता हुआ। "ठक-ठक! इस छोटे घर में कौन रहता है?" "मैं कुतरू चुहिया। और तुम कौन हो?" "मैं फुदकू मेंढक। मुझे भी अंदर आने दो!" "आ जाओ!" और अब हो गए दो।

फिर एक खरगोश पेड़ों के बीच से उछलता हुआ आया। "ठक-ठक! इस छोटे घर में कौन रहता है?" "कुतरू चुहिया और फुदकू मेंढक। और तुम कौन हो?" "मैं उछलू खरगोश। मुझे भी अंदर आने दो!" "आ जाओ!" दस्ताना थोड़ा-सा खिंच गया, और अब हो गए तीन। फिर एक लोमड़ी आई, उसकी पूँछ रोएँदार और झबरीली थी। "ठक-ठक! यहाँ कौन रहता है?" "चुहिया, मेंढक और खरगोश। तुम कौन हो?" "मैं लोमड़ी बहन। मुझे भी आने दो!" "आ जाओ!" और अब हो गए चार।

फिर एक भेड़िया आया, उसकी नाक ठंड से लाल थी। "ठक-ठक! इस छोटे घर में कौन रहता है?" "चुहिया, मेंढक, खरगोश और लोमड़ी। और तुम कौन हो?" "मैं सलेटी भेड़िया। मुझे भी अंदर आने दो!" "अच्छा, ठीक है, आ जाओ।" पिच्च! अब हो गए पाँच। फिर एक जंगली सूअर घुर्र-घुर्र करता आया। "घुर्र-घुर्र! मुझे भी आने दो!" "पर यहाँ जगह नहीं है!" "मैं समा जाऊँगा!" पचाक! और अब हो गए छह, सब एक-दूसरे से चिपककर बैठे थे।

फिर एक बड़ा-सा भूरा भालू आया, धम-धम, धम-धम, बर्फ़ पर चलता हुआ। "ठक-ठक! इस छोटे घर में कौन रहता है?" "कुतरू चुहिया, फुदकू मेंढक, उछलू खरगोश, लोमड़ी बहन, सलेटी भेड़िया और घुरघुरू सूअर। और तुम कौन हो?" "मैं बड़ा भालू," भालू बोला। "मुझे भी अंदर आने दो। मुझे ठंड लग रही है।" "पर यहाँ जगह नहीं है!" सब बोले। "अरे, आने दो न," भालू ने कहा। "अच्छा... ठीक है।" और फिर बड़े ज़ोर की ठस्स-ठूँस के साथ भालू भी अंदर घुस गया।

अब दस्ताने में सात जानवर थे। अंदर बहुत गरमी थी, और बहुत भीड़ भी। दस्ताना खिंचता गया, खिंचता गया, खिंचता गया। उसके टाँके चर्र-चर्र करने लगे। चुहिया तो दबते-दबते अँगूठे में जा पहुँची। "कितना मज़ा आ रहा है न?" भालू ख़ुश होकर बोला। "बहुत मज़ा," चुहिया चीं-चीं करके बोली। "पर थोड़ा-सा ज़्यादा ही मज़ा!" तभी दूर से उन्हें एक आवाज़ सुनाई दी: "भौं! भौं! भौं!"

दादाजी ने देखा कि उनका दस्ताना कहीं खो गया है। "अरे, वो तो मेरी पोती ने बुना था," वे बोले। "चलो छोटू, वापस चलकर उसे ढूँढ़ते हैं।" तो वे दोनों जंगल में वापस चल पड़े, चर-मर, चर-मर। छोटा कुत्ता बर्फ़ सूँघता हुआ आगे-आगे दौड़ा। और जब उसने वह बड़ा, गोल, लाल दस्ताना देखा, जो हिल रहा था और डोल रहा था, तो वह पूरे ज़ोर से भौंका: "भौं! भौं! भौं!"

जानवर तो बहुत चौंक गए! एक-एक करके सब बाहर लुढ़क पड़े: भालू, सूअर, भेड़िया, लोमड़ी, खरगोश, मेंढक, और सबसे आख़िर में छोटी-सी चुहिया। और फिर सब अपने-अपने गरम घरों की ओर जंगल में भाग गए। दादाजी ने अपना दस्ताना उठा लिया। वह थोड़ा-सा खिंच गया था, और थोड़ा-सा गरम था। "कितनी अजीब बात है," वे बोले, और मुस्कुरा दिए। उन्होंने दस्ताना पहन लिया और अपने गरम घर चल दिए, जहाँ उनकी पोती गरमागरम चाय लेकर उनका इंतज़ार कर रही थी। शुभ रात्रि।

हम क्या सीख सकते हैं

थोड़ा खिसक जाएँ तो ठंड से काँपते हर किसी के लिए जगह निकल आती है।

किनके लिए सबसे अच्छी: उम्र 2–6 साल

दोहराव और धीमी लय 2 से 6 साल के बच्चों को सोने से पहले शांत होने में मदद करती है।

यह कहानी कहाँ से आई

Rukavychka (Рукавичка) — Traditional Ukrainian folktale (anonymous), c. 1890. Lullaquill द्वारा सोने के समय के लिए दोबारा सुनाई गई। यह एक पुरानी, सार्वजनिक कहानी का हमारा अपना नया रूप है।

आज रात की कहानी का हीरो बनाइए अपने बच्चे को

Lullaquill ऐप में अपने बच्चे का नाम और कुछ पसंदीदा चीज़ें लिखिए। ऐप उसी को नायक बनाकर एक शांत, कोमल सोने की कहानी रचता है — तस्वीरों और मीठी आवाज़ के साथ।

लूना

रात की टोपी पहने छोटी खरगोश लूना हर रात तुम्हें कहानी सुनाती है।

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