हैंसल और ग्रेटेल
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कहानी में क्या होता है
हैंसल और ग्रेटेल एक सफ़ेद चिड़िया के पीछे जंगल में दूर निकल जाते हैं और घर का रास्ता भूल जाते हैं। उन्हें मिठाई और केक का एक घर मिलता है, पर उसमें रहने वाली बुढ़िया उतनी भली नहीं है जितनी दिखती है। समझदारी और हाथ थामे रहने से बच्चे घर लौट आते हैं।

एक बड़े हरे जंगल के किनारे एक छोटा-सा लकड़ी का घर था। वहाँ एक लकड़हारा, उसकी पत्नी और उनके दो बच्चे रहते थे, हैंसल और ग्रेटेल। उनका घर बड़ा नहीं था, पर उसमें रोटी और चीड़ की भीनी-भीनी खुशबू आती थी। हर रात माँ उन्हें प्यार से चूमती और कहती, "हाथ में हाथ, मेरे नन्हे बच्चो। हाथ में हाथ, तो तुम्हें रास्ता मिल ही जाएगा।" "हाथ में हाथ," बच्चे बोलते, और पिताजी दीया बुझा देते।

एक सुहानी सुबह पिताजी लकड़ी काटने चले, और बच्चे भी साथ चल दिए, जामुन और बेर चुनने। "वहीं रहना जहाँ तुम्हें मेरी कुल्हाड़ी की आवाज़ सुनाई दे," पिताजी ने कहा। हैंसल ने अपनी जेब में रोटी भर ली, और रास्ते की निशानी के लिए यहाँ एक टुकड़ा, वहाँ एक टुकड़ा गिराता गया। तभी ग्रेटेल ने एक नन्ही-सी सफ़ेद चिड़िया देखी। वह फुदकती थी, चहचहाती थी, और बच्चे उसके पीछे चल पड़े, बस थोड़ी दूर, और फिर थोड़ी दूर और।

जल्दी ही कुल्हाड़ी की आवाज़ आनी बिल्कुल बंद हो गई। "चलो, मेरे टुकड़ों के पीछे-पीछे चलते हैं," हैंसल बोला। पर टुकड़े तो गायब थे। जंगल की चिड़ियाँ सब खा गई थीं! सारे पेड़ एक जैसे दिख रहे थे, और रोशनी नरम और सुनहरी हो चली थी। ग्रेटेल के होंठ काँपने लगे। हैंसल ने उसका हाथ थाम लिया। "हाथ में हाथ," वह बोला, और ग्रेटेल ने सिर हिला दिया। दूर कहीं सफ़ेद चिड़िया फिर चहचहाई, और दोनों उसी गीत की ओर चल पड़े।

एक खुली जगह में उन्हें सबसे अनोखा छोटा-सा घर दिखा, ऐसा घर जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। उसकी दीवारें जिंजरब्रेड की थीं। छत केक की थी। खिड़कियाँ साफ़, चमकती चीनी की थीं। हैंसल ने छत का एक कोना तोड़ लिया। ग्रेटेल ने खिड़की को चाट लिया। तभी घर के अंदर से एक चरमराती-सी आवाज़ आई, "कुतर-कुतर, चूहे जैसे, कौन कुतरे मेरा घर ऐसे?" दरवाज़ा खुल गया, और बैंगनी शॉल ओढ़े एक छोटी-सी बूढ़ी औरत बाहर आई।

"आओ, आओ, अंदर आओ," वह बोली। उसने उन्हें पैनकेक खिलाए और सुला दिया। पर सुबह उसकी आवाज़ मीठी नहीं थी। "तुमने मेरी छत खा ली," वह बोली। "अब तुम यहीं रहोगे, मेरा फ़र्श बुहारोगे और मेरे बर्तनों में कलछी चलाओगे, हमेशा-हमेशा के लिए!" वह एक जादूगरनी थी, और बहुत रौब झाड़ने वाली। उसने सामने का दरवाज़ा बंद कर दिया और चाबी खूँटी पर टाँग दी। दिन भर बच्चे काम करते। रात भर वे धीरे से कहते, "हाथ में हाथ।"

ग्रेटेल देखती रही, और ग्रेटेल सोचती रही। पीछे भी एक दरवाज़ा था, जिसकी लकड़ी की कुंडी बड़ी कड़ी थी। एक सुबह वह उसके पास खड़ी हो गई, बड़ी उलझन में दिखती हुई। "अम्मा जी," वह बोली, "ये कुंडी कैसे खुलती है? मुझसे नहीं खुल रही।" "अरी भोली लड़की," जादूगरनी झल्लाई। "बस ऐसे कदम रखकर निकल जाओ।" और वह बाहर बगीचे में निकल गई। पलक झपकते ही ग्रेटेल ने दरवाज़ा धकेल दिया। खट! कुंडी गिर गई। जादूगरनी दरवाज़े की गलत तरफ़ रह गई।

"खोलो!" वह चिल्लाई। उसने दरवाज़ा खड़खड़ाया, पैर पटके। तभी पेड़ों से जंगल की चिड़ियाँ उतर आईं, सैकड़ों-सैकड़ों, क्योंकि उन्हें केक की खुशबू आ गई थी। ठक-ठक-ठक छत पर! "हट! हट! मेरा घर!" जादूगरनी चिल्लाई, और वह उनके पीछे भागी, पहाड़ी के पार, बहुत दूर, और उस जंगल ने उसे फिर कभी नहीं देखा। हैंसल ने खूँटी से चाबी उतार ली। ग्रेटेल ने अपना आँचल जिंजरब्रेड से भर लिया। हाथ में हाथ थामे, दोनों भागकर धूप में निकल आए।

सफ़ेद चिड़िया आगे-आगे उड़ी, और वे उसके पीछे चले। तभी पेड़ों के बीच से उन्हें आवाज़ें सुनाई दीं। "हैंसल! ग्रेटेल!" रास्ते पर दो लालटेनें झूलती हुई आ रही थीं। माँ और पिताजी हर दिन और हर रात उन्हें ढूँढते रहे थे, और कभी रुके नहीं थे। आहा, कितना गले लगना! आहा, कितनी नाक की पप्पियाँ! सब घर चले, हाथ में हाथ में हाथ में हाथ। रात के खाने में जिंजरब्रेड मिली, और नरम, गरम बिस्तर। माँ ने उन्हें चूमा। दीया बुझ गया। शुभ रात्रि, नन्हे बच्चो।
हम क्या सीख सकते हैं
जब हम एक-दूसरे का हाथ थामकर साथ सोचते हैं, तो घर का रास्ता मिल जाता है।
किनके लिए सबसे अच्छी: उम्र 3–8 साल
यह जानी-पहचानी कोमल कहानी सुखद अंत वाली है, इसलिए 3 से 8 साल के बच्चों के लिए सोने से पहले ठीक है।
यह कहानी कहाँ से आई
Hänsel und Gretel, Kinder- und Hausmärchen — Brothers Grimm (Jacob and Wilhelm Grimm), c. 1812. Lullaquill द्वारा सोने के समय के लिए दोबारा सुनाई गई। यह एक पुरानी, सार्वजनिक कहानी का हमारा अपना नया रूप है।
आज रात की कहानी का हीरो बनाइए अपने बच्चे को
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रात की टोपी पहने छोटी खरगोश लूना हर रात तुम्हें कहानी सुनाती है।
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