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शेर और चुहिया

5 मिनटउम्र 3–7 साल
शेर और चुहिया

इस भाषा में कहानी सुनने की सुविधा ऐप में उपलब्ध है।

कहानी में क्या होता है

एक नन्ही चुहिया भागते हुए सोते शेर की नाक पर चढ़ जाती है। शेर उसके मदद के वादे पर हँसता है, पर उसे जाने देता है। बाद में जब शेर को मदद चाहिए होती है, तब छोटी दोस्त बहुत हिम्मत और सच्ची दोस्ती दिखाती है।

सुनहरे, खुले घास के मैदान में, एक बड़े से बबूल के पेड़ के नीचे, एक शेर सो रहा था। वह सबसे बड़ा और सबसे ताकतवर शेर था, और उसके खर्राटे बादल की गड़गड़ाहट जैसे थे। घर्र... घर्र... तभी एक नन्ही चुहिया दाने ढूँढती हुई दौड़ती हुई आई। वह इतनी जल्दी में थी कि देख ही नहीं पाई कि कहाँ जा रही है। टप-टप-टप, वह शेर के बड़े से पंजे पर चढ़ी, और सीधे उसकी नाक के ऊपर से दौड़ गई!

शेर की नींद खुल गई और उसे ज़ोर की छींक आई। "आ-छीं!" झट से उसने अपने पंजे में नन्ही चुहिया को पूँछ से पकड़ लिया। "किसने हिम्मत की मुझे जगाने की? मैं इस मैदान का राजा हूँ!" वह दहाड़ा। नन्ही चुहिया थर-थर काँपने लगी। "अरे, महाराज शेर, मुझे माफ़ कर दीजिए! मैं आपको जगाना नहीं चाहती थी। मुझे जाने दीजिए। हो सकता है, किसी दिन मैं भी आपकी मदद कर दूँ।"

शेर इतने ज़ोर से हँसा कि पेड़ के पत्ते हिलने लगे। "हा हा हा! तू? मेरी मदद करेगी? इतनी सी चुहिया, इतने बड़े शेर की मदद? यह तो मैंने पूरे साल की सबसे मज़ेदार बात सुनी!" पर शेर को भूख नहीं थी, चुहिया बहुत छोटी थी, और उसने कितने प्यार से माफ़ी माँगी थी। "जा, नन्ही, जा," शेर हँसते हुए बोला और उसने अपना पंजा खोल दिया। "शुक्रिया, शुक्रिया!" चुहिया चूँ-चूँ करके बोली। "मैं यह बात कभी नहीं भूलूँगी!" और वह भागकर घास में छिप गई।

कुछ दिन बाद शेर लंबी घास में चल रहा था। वह आराम करने के लिए कोई ठंडी जगह ढूँढ रहा था। उसे दिखा ही नहीं कि शिकारियों ने रास्ते में रस्सियों का बड़ा सा जाल छिपा रखा है। सर्र! जाल उसके ऊपर आ गिरा। शेर ने खींचा। उसने धकेला। वह लुढ़का। पर वह जितना छटपटाता, रस्सियाँ उतनी ही कस जातीं। "बचाओ!" वह दहाड़ा। उसकी ज़ोरदार दहाड़ पूरे मैदान में गूँज गई, दूर नदी तक पहुँच गई।

बहुत दूर नन्ही चुहिया ने वह दहाड़ सुनी। वह इस आवाज़ को पहचानती थी! "अरे, यह तो मेरा दोस्त शेर है," वह बोली। "वह मुसीबत में है!" दूसरे जानवर उस बड़ी आवाज़ से डरकर भाग गए। पर नन्ही चुहिया उसी ओर दौड़ पड़ी, अपने नन्हे-नन्हे पैरों से जितनी तेज़ दौड़ सकती थी। घास के बीच से, पत्थरों के ऊपर से, झाड़ियों के नीचे से, टप-टप, टप-टप, और आख़िर उसने शेर को जाल में फँसा हुआ पाया।

"घबराओ मत, शेर भैया," वह बोली। "मैं तुम्हारी मदद करने आई हूँ।" "तू?" शेर ने कहा, पर इस बार वह हँसा नहीं। नन्ही चुहिया जाल पर चढ़ गई और अपने तेज़, नन्हे दाँतों से रस्सियाँ कुतरने लगी। कुतर-कुतर, कट! एक रस्सी टूट गई। कुतर-कुतर, कट! दूसरी रस्सी टूट गई। वह लगी रही, लगी रही, और जाल का छेद बड़ा, और बड़ा होता गया।

आख़िर छेद इतना बड़ा हो गया कि शेर बाहर निकल आया। उसने अपनी सुनहरी अयाल झटकी। वह आज़ाद था! उसने नीचे नन्ही चुहिया को देखा, और उसकी आँखों में शुक्रिया भरा था। "मेरी नन्ही दोस्त," वह प्यार से बोला, "मैं तुझ पर हँसा था। मैंने कहा था कि चुहिया शेर की मदद कभी नहीं कर सकती। पर तूने मेरी जान बचाई। मुझे माफ़ कर दे कि मैं हँसा।" नन्ही चुहिया मुस्कुराई। "दोस्त इसीलिए तो होते हैं।"

उस दिन के बाद शेर और चुहिया पक्के दोस्त बन गए। चुहिया अक्सर शेर के सिर पर बैठकर सवारी करती, घास से बहुत ऊँचे, और शेर ध्यान रखता कि कोई उसे तंग न करे। और शेर हमेशा याद रखता: कोई दोस्त इतना छोटा नहीं होता, और कोई अच्छाई कभी बेकार नहीं जाती। बड़े बबूल के पेड़ के नीचे, दोनों साथ बैठकर तारों को निकलते देखते। शुभ रात्रि।

हम क्या सीख सकते हैं

कोई भी मदद करने के लिए बहुत छोटा नहीं होता, और अच्छाई कभी बेकार नहीं जाती।

किनके लिए सबसे अच्छी: उम्र 3–7 साल

धीमी लय, कोमल दोहराव और प्यारा अंत इसे 3 से 7 साल के बच्चों के लिए सोने से पहले सुनाने लायक बनाते हैं।

यह कहानी कहाँ से आई

The Lion and the Mouse (Perry Index 150) — Aesop, 550 BCE. Lullaquill द्वारा सोने के समय के लिए दोबारा सुनाई गई। यह एक पुरानी, सार्वजनिक कहानी का हमारा अपना नया रूप है।

आज रात की कहानी का हीरो बनाइए अपने बच्चे को

Lullaquill ऐप में अपने बच्चे का नाम और कुछ पसंदीदा चीज़ें लिखिए। ऐप उसी को नायक बनाकर एक शांत, कोमल सोने की कहानी रचता है — तस्वीरों और मीठी आवाज़ के साथ।

लूना

रात की टोपी पहने छोटी खरगोश लूना हर रात तुम्हें कहानी सुनाती है।

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