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चींटी और टिड्डा

5 मिनटउम्र 3–8 साल
चींटी और टिड्डा

इस भाषा में कहानी सुनने की सुविधा ऐप में उपलब्ध है।

कहानी में क्या होता है

टिड्डा सारी गर्मी अपनी छोटी सी वायलिन बजाता और गाता रहता है, जबकि चींटियाँ मेहनत करके खाना जमा करती हैं। सर्दी आने पर उसके पास खाने को कुछ नहीं बचता। चींटियाँ उसके साथ खाना बाँटती हैं और वह उन्हें मीठा संगीत सुनाता है।

गर्मी का मौसम था। चमकती धूप थी और खूब गर्मी थी। हरे-भरे बड़े से मैदान में घास की एक लंबी पत्ती पर एक टिड्डा बैठा था। वह अपना छोटा-सा वायलिन बजा रहा था और गा रहा था। "गर्मी आई, आसमान है नीला, कुछ न करने का दिन है रंगीला, ला-ला-ला!" वह नाचा, वह कूदा, और सारा दिन बजाता रहा। सूरज चमक रहा था, और फूल उसके संगीत पर सिर हिला-हिलाकर झूम रहे थे।

नीचे से चींटियों की एक लंबी कतार गुज़री। हर चींटी अपनी पीठ पर गेहूँ का एक दाना या कोई बीज उठाए हुए थी। एक, दो! एक, दो! एक, दो! "नमस्ते, चींटी रानी!" टिड्डे ने आवाज़ लगाई। "इतनी प्यारी धूप में तुम इतनी मेहनत क्यों कर रही हो? आओ, मेरे साथ गाओ!" "माफ़ करना, मैं नहीं आ सकती," छोटी चींटी बोली। "हम सर्दियों के लिए खाना जमा कर रहे हैं। तुम्हें भी यही करना चाहिए।" "सर्दी?" टिड्डा हँस पड़ा। "सर्दी तो अभी बहुत दूर है!"

रोज़ यही होता था। चींटियाँ काम करतीं, और टिड्डा खेलता। "टिड्डे भैया, दिन छोटे होने लगे हैं," चींटी ने कहा। "अभी बहुत वक़्त है!" उसने गाकर कहा। "टिड्डे भैया, रातें ठंडी होने लगी हैं," चींटी ने कहा। "अभी बहुत वक़्त है!" उसने फिर गाकर कहा। और वह पत्ते के झूले में लेटकर वायलिन बजाता रहा, और चींटियाँ अपना घर दानों और बीजों से भरती रहीं, कमरा-दर-कमरा-दर-कमरा।

फिर पतझड़ आ गया। पत्ते भूरे हो गए और पेड़ों से झड़ गए। फूलों ने अपनी पंखुड़ियाँ बंद कर लीं और सो गए। घास सूखकर पीली पड़ गई। एक सुबह टिड्डे की आँख खुली तो वह काँप रहा था। उसकी टोपी पर पाला जमा था! उसने खाने के लिए कुछ ढूँढ़ा। लेकिन मैदान खाली था। न बीज थे, न पत्ते, न मीठी घास। "हाय राम," वह बोला। "हाय राम, हाय राम।"

फिर बर्फ़ गिरने लगी। नरम-नरम, सफ़ेद-सफ़ेद, और बहुत-बहुत ठंडी। बेचारा टिड्डा भूखा था और ठंड से काँप रहा था। वह वायलिन बगल में दबाए बर्फ़ में चलता रहा, चलता रहा, और चलते-चलते चींटियों के घर पहुँचा। ठक-ठक-ठक! छोटी चींटी ने दरवाज़ा खोला। "अरे, टिड्डे भैया!" वह बोली। "चींटी रानी, मेहरबानी करो..." वह धीमी आवाज़ में बोला, "मुझे बहुत ठंड लग रही है और भूख भी लगी है। मैंने तुम्हारी बात नहीं मानी। मुझे माफ़ कर दो। क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?"

चींटी ने काँपते हुए टिड्डे को देखा। बाकी चींटियाँ भी उसके पीछे आ खड़ी हुईं। "तुम्हें गर्मियों में काम करना चाहिए था," एक चींटी बोली। पर छोटी चींटी ने कहा, "अब वह यह जान गया है। और हमारे पास सबके लिए बहुत है।" तो वे टिड्डे को अंदर ले आईं। उन्होंने उसे एक गरम कंबल दिया और बीजों का एक बड़ा-सा कटोरा। "शुक्रिया," टिड्डा बोला, और खुशी का एक आँसू उसके गाल पर लुढ़क गया। "मैं तुम्हारा एहसान कैसे चुकाऊँ?"

"अच्छा," छोटी चींटी बोली, "सर्दी बहुत लंबी होती है, और यहाँ नीचे बहुत सन्नाटा रहता है। क्या तुम हमें एक गाना सुनाओगे?" टिड्डा खूब मुस्कुराया, अपनी सबसे बड़ी मुस्कान। उसने अपना वायलिन उठाया और बजाने लगा। उसने खुशी के गाने बजाए और मज़ेदार गाने बजाए, और चींटियाँ तालियाँ बजाकर नाचने लगीं। पूरी सर्दी भर, चींटियों से खाना मिला, और टिड्डे से संगीत। वह चींटियों की बाँबी की अब तक की सबसे मज़ेदार सर्दी थी।

जब फिर से गर्मी आई, तो टिड्डा अब भी अपना वायलिन बजाता था। लेकिन सुबह-सुबह वह चींटियों के साथ काम करता, बीज उठाता, और काम के गीत गाता, ताकि वक़्त मज़े से कट जाए। "थोड़ा काम, थोड़ा खेल," वह गाता, "सर्दी के लिए रहेंगे तैयार, हम सब मेल से!" और उस साल जब बर्फ़ गिरी, तो सब गरम थे, सबके पेट भरे थे, और सब खुश थे। शुभ रात्रि।

हम क्या सीख सकते हैं

थोड़ा काम और थोड़ा खेल हमें गर्म रखता है, और बाँटने से सब खुश होते हैं।

किनके लिए सबसे अच्छी: उम्र 3–8 साल

प्यारा अंत, दोहराई जाने वाली पंक्तियाँ और शांत संगीत इस कहानी को छोटे बच्चों के सोने से पहले के लिए सही बनाते हैं।

यह कहानी कहाँ से आई

The Ant and the Grasshopper (Perry Index 373) — Aesop, 550 BCE. Lullaquill द्वारा सोने के समय के लिए दोबारा सुनाई गई। यह एक पुरानी, सार्वजनिक कहानी का हमारा अपना नया रूप है।

आज रात की कहानी का हीरो बनाइए अपने बच्चे को

Lullaquill ऐप में अपने बच्चे का नाम और कुछ पसंदीदा चीज़ें लिखिए। ऐप उसी को नायक बनाकर एक शांत, कोमल सोने की कहानी रचता है — तस्वीरों और मीठी आवाज़ के साथ।

लूना

रात की टोपी पहने छोटी खरगोश लूना हर रात तुम्हें कहानी सुनाती है।

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