थम्बेलिना
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कहानी में क्या होता है
एक दयालु औरत को बच्चे की बहुत चाह है, और उसे जौ का एक दाना मिलता है। उससे एक फूल उगता है, जिसके अंदर नन्ही-सी बच्ची बैठी है, थम्बेलिना। वह एक बड़ी यात्रा करती है, अच्छे दोस्त बनाती है और धूप व फूलों से भरा घर पाती है।
एक बार की बात है। एक नेक औरत थी। उसका बड़ा मन था कि उसका अपना एक बच्चा हो। एक दिन एक बूढ़ी, समझदार दादी ने उसे जौ का एक दाना दिया। “इसे बो दो,” दादी ने कहा। औरत ने दाने को गमले में बो दिया। देखते-देखते उसमें एक सुंदर लाल फूल उग आया, ठीक ट्यूलिप जैसा। “कितना प्यारा फूल है!” औरत बोली, और उसने फूल की पंखुड़ियों को चूम लिया। पट! फूल खिल गया। और उसके बीच में बैठी थी एक नन्ही-सी बच्ची, बस अँगूठे जितनी। इसलिए औरत ने उसका नाम रखा थम्बेलिना।
थम्बेलिना अखरोट के खोल के पालने में सोती थी। उसका कंबल गुलाब की पंखुड़ी का था। दिन में वह पानी की एक थाली में ट्यूलिप की पंखुड़ी की नाव चलाती थी। घोड़े के दो सफ़ेद बाल उसके चप्पू थे। और वह इतना मीठा, मुलायम गाना गाती थी कि जो भी सुनता, मुस्कुरा उठता। पर एक रात, जब थम्बेलिना सो रही थी, एक बड़ी, गीली मेंढकी खुली खिड़की से फुदककर अंदर आ गई। “अरे वाह! मेरे बेटे की दुल्हन कितनी प्यारी रहेगी!” मेंढकी टर्र-टर्र करके बोली। और वह अखरोट का खोल उठाकर नदी की ओर चल दी।
सुबह थम्बेलिना की आँख खुली। वह नदी के बीच में, कमल के एक बड़े हरे पत्ते पर थी। “टर्र-टर्र, तुम मेरे बेटे से ब्याह करोगी,” मेंढकी बोली। थम्बेलिना को मेंढक से ब्याह करना बिल्कुल पसंद नहीं था। वह रोने लगी। नदी की छोटी मछलियों ने उसका रोना सुना। “यह तो इतनी प्यारी है, कीचड़ में नहीं रह सकती,” वे बोलीं। तो उन्होंने कमल के पत्ते की डंडी कुतर दी। और पत्ता नदी में बहने लगा, बहता गया, थम्बेलिना को लेकर बहुत दूर, बहुत दूर।
पूरी गर्मियों भर थम्बेलिना बड़े जंगल में अकेली रही। उसने घास से एक छोटा-सा बिस्तर बुना। उसे एक बड़े पत्ते के नीचे टाँग दिया, ताकि बारिश न लगे। वह फूलों का मीठा रस पीती और पत्तों पर पड़ी सुबह की ओस पीती। चिड़ियाँ उसे गाना सुनातीं, और वह भी उन्हें गाना सुनाती। फिर गर्मियाँ खत्म हो गईं। पत्ते झड़ गए, ठंडी हवा चलने लगी, और बर्फ़ के फाहे गिरने लगे। नन्ही थम्बेलिना के लिए हर फाहा एक तकिए जितना बड़ा था।
थम्बेलिना ठंड से काँप रही थी। उसने ज़मीन के नीचे एक छोटे-से दरवाज़े पर खटखट की। वह खेत की एक बूढ़ी चुहिया का घर था। “अरे बेचारी बच्ची!” चुहिया ने प्यार से कहा। “आओ, मेरे गर्म कमरे में आ जाओ। मेरे साथ खाना खाओ।” थम्बेलिना सारी सर्दियाँ वहीं रही। वह झाड़ू लगाती और कहानियाँ सुनाती। चुहिया को वह बहुत प्यारी लगती थी। पर चुहिया का पड़ोसी, काले मखमली कोट वाला एक अमीर छछूंदर, थम्बेलिना से ब्याह करना चाहता था। वह बड़ा ठाठ-बाट वाला था, पर उसे धूप और फूल बिल्कुल पसंद नहीं थे। और थम्बेलिना को वह अच्छा नहीं लगता था।
एक दिन छछूंदर की अँधेरी सुरंग में थम्बेलिना को एक अबाबील दिखी। वह चुपचाप पड़ी थी, हिल भी नहीं रही थी। “इसे कितनी ठंड लग रही है,” थम्बेलिना धीरे से बोली। उसने सूखी घास का एक नरम कंबल बुना और अबाबील को ओढ़ा दिया। हर रात वह एक पत्ते में भरकर उसके लिए पानी लाती। धीरे-धीरे अबाबील गर्म और ताकतवर हो गई। “शुक्रिया, नन्ही बच्ची,” वह बोली। “तुमने मेरी जान बचाई।” जब वसंत आया, तो अबाबील ने कहा, “मेरे साथ चलो, थम्बेलिना। मेरी पीठ पर बैठ जाओ। मैं तुम्हें एक धूप वाले देश ले चलूँगी।”
थम्बेलिना को वह अँधेरी सुरंग याद आई, और वह चिड़चिड़ा छछूंदर भी। “हाँ,” वह बोली, “मैं चलूँगी!” उसने खेत की चुहिया को प्यार से अलविदा कहा और अबाबील की पीठ पर चढ़ गई। ऊपर, और ऊपर, वे उड़ते गए। जंगलों के ऊपर से, पहाड़ों के ऊपर से, चमकते नीले समुद्र के ऊपर से। हवा गर्म और मीठी होती गई। आखिर वे एक ऐसे देश में पहुँचे जो फूलों से भरा था। वहाँ एक झील के किनारे एक सफ़ेद महल था। अबाबील ने थम्बेलिना को एक सुंदर सफ़ेद फूल पर बिठा दिया।
फूल के बीच में एक नन्हा राजकुमार बैठा था, थम्बेलिना जितना ही छोटा। उसके सिर पर छोटा-सा सुनहरा मुकुट था, और पीठ पर साफ़, चमकते पंख। हर फूल में एक नन्हा फूल-आदमी रहता था, और वह उन सबका राजा था। “स्वागत है,” उसने मुस्कुराकर कहा। सारे फूल-लोग उपहार लाए। और सबसे अच्छा उपहार था, झिलमिल करते पंखों की एक जोड़ी। अब थम्बेलिना फूल-फूल पर उड़ सकती थी! उसे अपने ही नाप के दोस्त मिल गए थे, और धूप से भरा एक घर। और हर शाम, जब वह गुलाब के फूल में सो जाती, अबाबील उसे एक खुशी का गीत सुनाती। शुभ रात्रि।
हम क्या सीख सकते हैं
जो दूसरों के साथ अच्छा करता है, उसे अच्छे दोस्त मिलते हैं।
किनके लिए सबसे अच्छी: उम्र 3–8 साल
प्यारे जानवरों और खुशहाल अंत वाली यह कोमल कहानी 3 से 8 साल के बच्चों के सोने के समय के लिए ठीक है।
यह कहानी कहाँ से आई
Tommelise — Hans Christian Andersen, c. 1835. Lullaquill द्वारा सोने के समय के लिए दोबारा सुनाई गई। यह एक पुरानी, सार्वजनिक कहानी का हमारा अपना नया रूप है।
आज रात की कहानी का हीरो बनाइए अपने बच्चे को
Lullaquill ऐप में अपने बच्चे का नाम और कुछ पसंदीदा चीज़ें लिखिए। ऐप उसी को नायक बनाकर एक शांत, कोमल सोने की कहानी रचता है — तस्वीरों और मीठी आवाज़ के साथ।
रात की टोपी पहने छोटी खरगोश लूना हर रात तुम्हें कहानी सुनाती है।
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