जैक और जादुई सेम की बेल
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कहानी में क्या होता है
जैक अपनी गाय के बदले पाँच अजीब सेम के बीज ले आता है, और माँ उदास हो जाती है। सुबह एक विशाल बेल बादलों तक उग जाती है, जहाँ एक बड़ा महल है। जैक हिम्मत से ऊपर चढ़ता है और फिर घर लौटता है, जहाँ सब फिर से सुकून भरा हो जाता है।

बहुत पहले इंग्लैंड में जैक नाम का एक लड़का रहता था। उसके साथ उसकी माँ थी और उनकी गाय थी, मिल्की-व्हाइट। वे बहुत गरीब थे। एक सुबह मिल्की-व्हाइट ने ज़रा भी दूध नहीं दिया, और दलिये का बर्तन खाली पड़ा था। माँ ने आह भरकर कहा, "जैक, इसे बाज़ार ले जाओ। अच्छे दाम में बेचना, और रोटी के लिए कुछ पैसे घर ले आना।" जैक ने रस्सी पकड़ी, और दोनों चल पड़े, टप-टप, टप-टप, लंबी सड़क पर।

रास्ते में उसे एक मज़ेदार छोटे-से बूढ़े बाबा मिले। उन्होंने टेढ़ी-सी हरी टोपी पहन रखी थी। वे बोले, "वाह, कितनी बढ़िया गाय है! इसके बदले मैं तुम्हें पाँच सेम के दाने दूँगा। रात को इन्हें बो देना, सुबह तक ये आसमान तक पहुँच जाएँगे।" पाँच जादुई दाने! जैक को लगा, यह तो बहुत अच्छा सौदा है। पर उसकी माँ को ऐसा नहीं लगा। "सेम के दाने? अरे जैक!" दाने खिड़की से बाहर फेंक दिए गए, और जैक रोटी का एक टुकड़ा खाकर, भारी मन से सोने चला गया।

सुबह उसका कमरा हरी-हरी छाँव से भरा था। जैक भागकर बाहर गया। वहाँ सेम की एक बेल खड़ी थी, खलिहान जितनी मोटी, और उसकी चोटी बादलों में खो गई थी। हाथ के ऊपर हाथ, पत्ते पर पत्ता, ऊपर, ऊपर, ऊपर चढ़ता गया जैक। कौओं के पास से। बारिश के पास से। ऊपर, ऊपर, ऊपर, जब तक वह एक नरम सफ़ेद रास्ते पर नहीं उतर गया। रास्ते के आख़िर में एक महल था, इतना बड़ा कि उसके दरवाज़े की कुंडी जैक के सिर से बहुत ऊपर थी।

एक विशाल औरत ने दरवाज़ा खोला। उसकी आँखें बहुत प्यारी थीं। वह बोली, "अरे बेचारे, कितने दुबले हो!" और उसने जैक को रोटी और दूध दिया। तभी ज़मीन हिलने लगी। धम। धम। धम। "ये तो मेरे पति हैं! जल्दी, तांबे के बर्तन में छिप जाओ!" दैत्य अंदर आया, सूँ-सूँ सूँघता हुआ। "फ़ी, फ़ाई, फ़ो, फ़म, मुझे आ रही है रोटी के टुकड़ों वाले लड़के की बू!" "क्या बात करते हो जी," पत्नी बोली। "ये तो बस तुम्हारा रात का खाना है।" दैत्य खाने बैठ गया, और जैक पत्थर की तरह चुपचाप बैठा रहा।

खाने के बाद दैत्य ने अपनी मुर्गी को बुलाया। "अंडा दे!" वह बोला, और मुर्गी ने ठोस सोने का एक अंडा दिया। फिर उसने अपनी वीणा को बुलाया। "गा!" वह बोला, और वीणा इतना मीठा गाने लगी कि उसका बड़ा-सा सिर झूमने लगा। जल्दी ही वह खर्राटे भरने लगा। दैत्य की पत्नी ने बर्तन का ढक्कन उठाया। वह फुसफुसाकर बोली, "वह मुर्गी और वीणा तुम्हारे पिता की थीं। मेरे पति उन्हें बहुत पहले ले आए थे और कभी लौटाए नहीं। इन्हें घर ले जाओ, नन्हे बच्चे।"

जैक ने मुर्गी को एक बाँह में दबाया और वीणा को दूसरी बाँह में। लेकिन वीणा जाग गई। वह गा उठी, "मालिक! मालिक!" दैत्य ने एक आँख खोली। "फ़ी, फ़ाई, फ़ो, फ़म, किसने ली मेरी वीणा? आओ, आओ, आओ!" धम। धम। धम। बादलों के रास्ते पर दौड़ा जैक, और सेम की बेल पर उतर गया। हाथ के ऊपर हाथ, पत्ते पर पत्ता, नीचे, नीचे, नीचे। उसके ऊपर बेल हिलने लगी।

"माँ, कुल्हाड़ी!" ठक, ठक, ठक, चलाने लगा जैक। सेम की बेल ने एक लंबी हरी साँस ली। वह धीरे-धीरे, धीरे-धीरे झुकी, और हरी लंबी रिबन की तरह मैदान में लेट गई। ऊपर बादलों में दैत्य ने अपना बड़ा-सा जूता पीछे खींच लिया। वह बुदबुदाया, "बहुत हिलती है। और नीचे सब कुछ बहुत छोटा-सा है।" उसकी पत्नी उसके लिए खीर का कटोरा ले आई और धीमे-धीमे गुनगुनाने लगी। दैत्य को लगा कि यह तो वीणा से भी ज़्यादा अच्छा है।

मुर्गी रोज़ एक सोने का अंडा देती, और वही बहुत था। जैक की माँ ने मिल्की-व्हाइट को वापस खरीद लिया, और बर्तन में फिर दलिया पकने लगा। और हर रात नन्ही वीणा उन्हें गाकर सुला देती। ऊपर बादलों में दैत्य खुशी-खुशी घर पर ही रहा। गर्मी की रात में अगर तुम्हें धीमी-सी गड़गड़ाहट सुनाई दे, तो डरना नहीं। वह बस दैत्य के खर्राटे हैं। फ़ी, फ़ाई, फ़ो, फ़म, अब सबके सोने का समय। शुभ रात्रि।
हम क्या सीख सकते हैं
हिम्मत और अच्छा दिल मुश्किल समय में घर को फिर से खुशहाल बना देते हैं।
किनके लिए सबसे अच्छी: उम्र 3–8 साल
यह शांत कहानी कोमल और खुशनुमा अंत के साथ है, इसलिए 3 से 8 साल के बच्चों के लिए सोने से पहले पढ़ने में बढ़िया है।
यह कहानी कहाँ से आई
The History of Jack and the Bean-Stalk (Tabart, 1807); Jack and the Beanstalk (Jacobs, English Fairy Tales, 1890) — English fairy tale, printed by Benjamin Tabart and Joseph Jacobs, c. 1807. Lullaquill द्वारा सोने के समय के लिए दोबारा सुनाई गई। यह एक पुरानी, सार्वजनिक कहानी का हमारा अपना नया रूप है।
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