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राजकुमारी और मटर का दाना

5 मिनटउम्र 3–7 साल
राजकुमारी और मटर का दाना

इस भाषा में कहानी सुनने की सुविधा ऐप में उपलब्ध है।

कहानी में क्या होता है

एक राजकुमार सच्ची राजकुमारी से शादी करना चाहता है, पर उसे कभी पक्का भरोसा नहीं होता। एक तूफ़ानी शाम भीगी हुई एक लड़की महल का दरवाज़ा खटखटाती है। बूढ़ी रानी उसे परखने के लिए ऊँचे गद्दों के नीचे मटर का एक छोटा दाना रख देती है।

एक समय की बात है। एक राजकुमार था। वह एक सच्ची राजकुमारी से शादी करना चाहता था। उसे ढूँढने के लिए वह पूरी दुनिया घूमा। उसे लंबी राजकुमारियाँ मिलीं, छोटी राजकुमारियाँ मिलीं। शोर मचाने वाली मिलीं, और चुपचाप रहने वाली भी मिलीं। पर पता नहीं क्यों, उसे कभी पक्का भरोसा नहीं हुआ कि वे सच्ची राजकुमारियाँ हैं। हर बार कुछ न कुछ ठीक नहीं लगता था। तो वह थोड़ा उदास होकर घर लौट आया, क्योंकि उसे सच में एक सच्ची राजकुमारी चाहिए थी।

एक शाम बहुत भयानक तूफ़ान आया। बादल गरजे, गड़-गड़, गड़-गड़! बिजली चमकी, और बारिश झरने की तरह बरसने लगी। तभी, ठक-ठक-ठक! किसी ने महल का फाटक खटखटाया। बूढ़े राजा खुद दरवाज़ा खोलने गए। वहाँ बारिश में एक लड़की खड़ी थी। पानी उसके बालों से बह रहा था, उसके लबादे से टपक रहा था, जूतों के आगे वाले हिस्से में भर रहा था और एड़ियों से बाहर निकल रहा था। "नमस्ते," वह बोली। "मैं एक राजकुमारी हूँ, और मैं रास्ता भूल गई हूँ।"

"सच्ची राजकुमारी? यह तो हम अभी देख लेंगे," बूढ़ी रानी ने मन में सोचा। पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। वे मेहमानों वाले कमरे में गईं, बिस्तर से सारी चादरें और गद्दे हटा दिए, और पलंग की तली में मटर का एक नन्हा हरा दाना रख दिया। फिर उस दाने के ऊपर बीस मुलायम गद्दे बिछा दिए। और गद्दों के ऊपर बीस नरम-नरम पंखों वाली रज़ाइयाँ रख दीं। पलंग इतना ऊँचा हो गया कि उस पर चढ़ने के लिए सीढ़ी चाहिए थी!

"बेटी, तुम्हारा बिस्तर तैयार है," रानी ने कहा। राजकुमारी ने ऊपर देखा, ऊपर, और ऊपर, और ऊपर। वह लंबी सीढ़ी पर चढ़ी, एक सीढ़ी, दो सीढ़ी, चढ़ते-चढ़ते बिल्कुल ऊपर तक। "शुभ रात्रि," रानी ने कहा, और दीया बुझा दिया। राजकुमारी ऊँचे, मुलायम पलंग पर लेट गई। बाहर हवा सीटी बजा रही थी। खिड़कियों पर बारिश टप-टप कर रही थी। और राजकुमारी कभी इधर पलटी, कभी उधर पलटी।

वह बाईं ओर पलटी। वह दाईं ओर पलटी। वह सिकुड़कर छोटी-सी बन गई, और फिर लंबी होकर पसर गई। पर वह कुछ भी करती, कुछ न कुछ उसे चुभ रहा था! "अरे, यह क्या है?" वह धीरे से बोली। उसने भेड़ें गिनीं। उसने तारे गिने। उसने एक छोटी-सी लोरी गुनगुनाई। पर उसे नींद नहीं आई। वह सारी रात करवटें बदलती रही, जब तक सुबह चिड़ियाँ चहचहाने नहीं लगीं।

सुबह रानी ने पूछा, "बेटी, नींद अच्छी आई?" "ओह, माफ़ कीजिए, पर मैं तो ज़रा भी नहीं सो पाई," राजकुमारी ने नम्रता से कहा। "बिस्तर में कोई सख़्त चीज़ थी। जैसे कोई छोटा-सा पत्थर हो। मेरे तो सारे बदन पर नीले निशान पड़ गए हैं!" रानी मुस्कुराईं। राजा मुस्कुराए। और राजकुमार तो सबसे ज़्यादा मुस्कुराया। सिर्फ़ एक सच्ची राजकुमारी ही बीस गद्दों और बीस रज़ाइयों के नीचे मटर का एक नन्हा दाना महसूस कर सकती थी!

"तुम सच्ची राजकुमारी हो!" राजकुमार ने कहा। और जल्दी ही उसे पता चला कि वह बहादुर भी है, दयालु भी है, और मज़ेदार कहानियाँ सुनाने में बहुत होशियार भी। वे दोनों रोज़ बाग़ में साथ-साथ घूमते। वे तारों की बातें करते, तूफ़ानी रात की बातें करते, और उस लंबी सीढ़ी की बातें करते। और जल्दी ही राजकुमार ने उससे शादी करने को कहा, और उसने हाँ कह दी।

और वह नन्हा मटर का दाना? उसे महल के संग्रहालय में काँच के डिब्बे में, नरम मखमली गद्दी पर रख दिया गया। वह आज भी वहाँ देखा जा सकता है, अगर किसी ने उसे हटा न दिया हो। और हर रात राजकुमारी अपने आरामदेह बिस्तर में सोती, जिसमें बस एक गद्दा था, एक रज़ाई थी, और मटर का एक भी दाना नहीं। वह सारी रात बड़े आराम से सोई, बिल्कुल वैसे ही जैसे तुम आज रात सोओगे। शुभ रात्रि।

हम क्या सीख सकते हैं

जो सच्चा होता है, उसे अपने आप को साबित करने की ज़रूरत नहीं होती।

किनके लिए सबसे अच्छी: उम्र 3–7 साल

यह शांत कहानी है और इसका अंत प्यारा है, इसलिए सोने से पहले 3 से 7 साल के बच्चों के लिए अच्छी है।

यह कहानी कहाँ से आई

Prindsessen paa Ærten — Hans Christian Andersen, c. 1835. Lullaquill द्वारा सोने के समय के लिए दोबारा सुनाई गई। यह एक पुरानी, सार्वजनिक कहानी का हमारा अपना नया रूप है।

आज रात की कहानी का हीरो बनाइए अपने बच्चे को

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लूना

रात की टोपी पहने छोटी खरगोश लूना हर रात तुम्हें कहानी सुनाती है।

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