बौने और मोची
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कहानी में क्या होता है
एक बूढ़े मोची के पास बस एक जोड़ी जूते भर का चमड़ा बचा है। सुबह वह देखता है कि जूते तैयार और बहुत सुंदर रखे हैं। उसकी मदद कौन कर रहा है? मोची और उसकी पत्नी यह जानना चाहते हैं और फिर प्यार से धन्यवाद कहने का तरीका सोचते हैं।

एक बार की बात है। एक छोटे-से कस्बे में टेढ़ी-मेढ़ी छतों वाले घर थे। वहीं तोबियास नाम का एक बूढ़ा मोची रहता था। वह रोज़ मन लगाकर काम करता था। ठक-ठक-ठक, उसका छोटा हथौड़ा चलता रहता था। लेकिन बुरे दिन चल रहे थे। एक शाम उसके पास बस एक जोड़ी जूतों भर का चमड़ा बचा था। उसने आह भरकर कहा, "चलो, आज रात मैं इसे काट लेता हूँ, और सुबह सिल लूँगा।" उसने टुकड़े सलीके से मेज़ पर रखे, मोमबत्ती बुझाई और सोने चला गया।

सुबह तोबियास आँखें मलते-मलते सीढ़ियों से नीचे आया। और उसने क्या देखा? मेज़ पर एक जोड़ी जूते रखे थे, बिलकुल तैयार! हर टाँका छोटा-छोटा और सीधा था। चमड़ा तो चमकते हुए भूरे सोने जैसा लग रहा था। "अजी सुनती हो, आओ, जल्दी आकर देखो!" उसने पुकारा। उसकी पत्नी दौड़ी आई। "इन्हें किसने बनाया होगा?" वह धीरे से बोली। किसी को पता नहीं था। उसी दिन एक साहब दुकान में आए। उन्हें जूते इतने पसंद आए कि उन्होंने इतने पैसे दिए, जिनसे दो और जोड़ी जूतों का चमड़ा आ जाए।

उस शाम तोबियास ने दो जोड़ी जूतों का चमड़ा काटा और मेज़ पर छोड़ दिया। सुबह देखा तो जूते तैयार थे, चमचमाते हुए! दो ग्राहकों ने उन्हें खरीद लिया, और तोबियास चार जोड़ी जूतों का चमड़ा ले आया। सुबह होते ही चार जोड़ी जूते तैयार मिले। फिर आठ जोड़ी। फिर और भी! जल्दी ही छोटी-सी दुकान खुश लोगों से भर गई। सब कस्बे के सबसे बढ़िया जूते पहनकर देख रहे थे। तोबियास और उसकी पत्नी की थाली में रोटी थी और चूल्हे के लिए लकड़ी भी। फिर भी उन्हें पता नहीं था कि उनके मददगार कौन हैं।

सर्दियों से ठीक पहले की एक रात तोबियास ने कहा, "सुनती हो, क्यों न हम जागकर देखें कि हमारी मदद कौन करता है?" "हाँ-हाँ, ज़रूर," पत्नी बोली। तो उन्होंने एक मोमबत्ती जलती छोड़ दी और कोने में टँगे कोटों के पीछे छिप गए। वे इंतज़ार करते रहे, करते रहे, दो चूहों की तरह चुपचाप। घड़ी चलती रही, टिक-टिक, टिक-टिक। कस्बा सो गया। और फिर आधी रात को एक नन्ही-सी आवाज़ आई: छम-छम, छम-छम।

दो नन्हे बौने फुदकते हुए फ़र्श पर आ गए! वे उछलकर मेज़ पर चढ़ गए। उन्होंने सुइयाँ और छोटे-छोटे हथौड़े उठाए और काम में लग गए। सिलाई, सिलाई, ठक-ठक! उनकी उँगलियाँ इतनी तेज़ चल रही थीं कि मोची को ठीक से दिखाई भी नहीं दे रहा था। वे गुनगुनाते हुए काम कर रहे थे। लेकिन तोबियास ने कुछ देखा। बौनों के पैरों में जूते नहीं थे, और उनके कपड़े पतले थे और जगह-जगह से फटे हुए थे। काम पूरा होते ही वे नीचे कूदे और रात के अँधेरे में भाग गए।

अगली सुबह पत्नी बोली, "इन प्यारे बौनों ने हमारी कितनी मदद की है। पर उन्हें ठंड लगती होगी। चलो, हम उनके लिए कुछ गरम बनाएँ।" "वाह, क्या अच्छा विचार है," तोबियास ने कहा। तो पत्नी ने दो छोटी कमीज़ें, दो छोटे कोट और ऊन के मोज़ों की दो जोड़ियाँ सिल दीं। और तोबियास ने नन्हे-नन्हे जूतों की दो जोड़ियाँ बनाईं। ऐसे छोटे और मुलायम जूते उसने पहले कभी नहीं बनाए थे। उस शाम चमड़े की जगह उन्होंने ये तोहफ़े मेज़ पर रख दिए। फिर वे दोनों दोबारा छिप गए।

आधी रात को छम-छम करते बौने आए। वे काम करने के लिए मेज़ पर चढ़े, पर वहाँ तो तोहफ़े रखे थे! उनकी आँखें फैल गईं। उन्होंने कमीज़ें, कोट, मोज़े और जूते पहन लिए। उन्होंने एक-दूसरे को देखा और हँसते-हँसते लोटपोट हो गए। फिर वे नाचने लगे! वे मेज़ पर नाचे, कुर्सियों पर नाचे, और नाचते-नाचते दरवाज़े से बाहर चले गए। वे अपने गरम नए कपड़ों के बारे में एक प्यारा-सा गीत गा रहे थे।

बौने फिर कभी जूते बनाने नहीं आए। पर कोई बात नहीं। तोबियास ने उनके सारे गुर सीख लिए थे, और उसकी दुकान जीवन भर अच्छी चलती रही। हर सर्दी में, जब बर्फ़ धीरे-धीरे गिरती, तो वह और उसकी पत्नी आग के पास बैठकर मुस्कुराते। वे कहते, "आज रात हमारे नन्हे दोस्त गरम होंगे, है न?" और कहीं दूर, तारों के नीचे, दो नन्हे बौने अपने नन्हे जूते पहने गरम और आरामदेह सो रहे थे। समाप्त। शुभ रात्रि।
हम क्या सीख सकते हैं
जो हमारी मदद करे, उसके लिए कुछ अच्छा करना बहुत प्यारी बात है।
किनके लिए सबसे अच्छी: उम्र 3–8 साल
यह शांत कहानी दयालु मददगारों और मीठे अंत के साथ 3 से 8 साल के बच्चों के लिए सोने से पहले ठीक है।
यह कहानी कहाँ से आई
Die Wichtelmänner (KHM 39) — Jacob and Wilhelm Grimm, c. 1812. Lullaquill द्वारा सोने के समय के लिए दोबारा सुनाई गई। यह एक पुरानी, सार्वजनिक कहानी का हमारा अपना नया रूप है।
आज रात की कहानी का हीरो बनाइए अपने बच्चे को
Lullaquill ऐप में अपने बच्चे का नाम और कुछ पसंदीदा चीज़ें लिखिए। ऐप उसी को नायक बनाकर एक शांत, कोमल सोने की कहानी रचता है — तस्वीरों और मीठी आवाज़ के साथ।
रात की टोपी पहने छोटी खरगोश लूना हर रात तुम्हें कहानी सुनाती है।
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